! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

766 Posts

2143 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12172 postid : 4

मेक-अप से बिगाड़ करती महिलाएं

Posted On: 11 Aug, 2012 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

कवि शायर कह कह कर मर गए-
”इस सादगी पे कौन न मर जाये ए-खुदा,”
”न कजरे की धार,न मोतियों के हार,
न कोई किया सिंगार फिर भी कितनी सुन्दर हो,तुम कितनी सुन्दर हो.”
पर क्या करें आज की महिलाओं के दिमाग का जो बाहरी सुन्दरता को ही सबसे ज्यादा महत्व देता रहा है और अपने शरीर का नुकसान तो करता ही है साथ ही घर का बजट भी बिगाड़ता है.लन्दन में किये गए एक सर्वे के मुताबिक ”एक महिला अपने पूरे जीवन में औसतन एक लाख पौंड यानी तकरीबन ७२ लाख रूपए का मेकअप बिल का भुगतान कर देती है .इसके मुताबिक १६ से ६५ वर्ष तक की उम्र की महिला ४० पौंड यानी लगभग तीन हज़ार रूपए प्रति सप्ताह अपने मेकअप पर खर्च करती हैं .दो हज़ार से अधिक महिलाओं के सर्वे में आधी महिलाओं का कहना था कि” बिना मेकअप के उनके बॉय फ्रैंड उन्हें पसंद ही नहीं करते हैं .”
”दो तिहाई का कहना है कि उनके मेकअप किट की कीमत ४० हज़ार रूपए है .”
”ब्रिटेन की महिलाओं के सर्वे में ५६ प्रतिशत महिलाओं का कहना था कि १५०० से २००० रूपए का मस्कारा खरीदने में ज्यादा नहीं सोचती हैं .”
ये तो चंद आंकड़े हैं जो इस तरह के सर्वे प्रस्तुत करते हैं लेकिन एक भेडचाल तो हम आये दिन अपने आस पास ही देखते रहते हैं वो ये कि महिलाएं इन्सान बन कर नहीं बल्कि प्रोडक्ट बन कर ज्यादा रहती हैं .और बात बात में महंगाई का रोना रोने वाली ये महिलाएं कितना ही महंगा उत्पाद हो खरीदने से झिझकती नही हैं .और जहाँ तक आज की युवतियों की कहें कि उन्हें बॉय फ्रैंड कि वजह से मेकअप करना पड़ता है तो ये भी उनकी भूल ही कही जाएगी .वे नहीं जानती सादगी की कीमत-
”इस सादगी पे कौन मर जाये ए खुदा .”
और फिर ये तो इन मेकअप की मारी महिलाओं को सोचना ही होगा कि आज जितनी बीमारियाँ महिलाओं में फ़ैल रही हैं उसका एक बड़ा कारण इनके मेकअप के सामान हैं .और एक शेर यदि वे ध्यान दें तो शायद इस और कुछ प्रमुखता कम हो सकती है.राम प्रकाश राकेश कहते हैं-
गागर छलका करती सागर नहीं छलकते देखे,
नकली कांच झलकता अक्स हीरे नहीं झलकते देखे,
कांटे सदा चुभन ही देते,अक्स फूल महकते देखे.
तो फिर क्या सोचना फूल बनने की चाह में वे कांटे क्यों बनी जा रही हैं .कुछ सोचें और इन्सान बने प्रोडक्ट नहीं.
shalini kaushik



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 3.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

6 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rekhafbd के द्वारा
August 13, 2012

शालिनी जी ,असली सुन्दरता तो सादगी में ही है ,बढ़िया लेख ,बधाई

Chandan rai के द्वारा
August 13, 2012

शालिनी जी , ”इस सादगी पे कौन न मर जाये ए-खुदा,” ”न कजरे की धार,न मोतियों के हार, न कोई किया सिंगार फिर भी कितनी सुन्दर हो,तुम कितनी सुन्दर हो.” बिलकुल ठीक सादगी ही पावन सुन्दरता है

Anil Kumar "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
August 13, 2012

shaalini ji, satya vachan insaan bane product nahi dikhaawe karne wala insaan kabhi sukoon se je nahi sakta use hamesha is dikhaawe ko barkaraar rakhne ki chinta sataati rahegi aur yah bhi ki kahin yah dikhawaa toota to koi mujhe poonchhega nahi, isse achchha yahi hai ki kam dost banao lekin aise jo aapke sachche swaroop ko pasand karte ho http://panditsameerkhan.jagranjunction.com/

phoolsingh के द्वारा
August 13, 2012

शालिनी जी …..नमस्कार बहुत ही सुंदर लेख……….. फूल सिंह

dineshaastik के द्वारा
August 11, 2012

शालिनी जी, बहुत ही चौकाने वाले आँकड़े प्रस्तुति किये हैं आपने।  संभवतः यह भारत के संबंध में तो नहीं होंगे। आपके आलेख के निम्न शब्द बहुत ही प्रभावशाली लगे- महिलाएं इन्सान बन कर नहीं बल्कि प्रोडक्ट बन कर ज्यादा रहती हैं .और बात बात में महंगाई का रोना रोने वाली ये महिलाएं कितना ही महंगा उत्पाद हो खरीदने से झिझकती नही हैं .और जहाँ तक आज की युवतियों की कहें कि उन्हें बॉय फ्रैंड कि वजह से मेकअप करना पड़ता है कभी मैंने किसी के लिये लिखा था- ये सादगी तुम्हारी, संसार मोह लेगी, मेकप से प्रेयसी तुम तन को नहीं सजाओ। मँहगाई पूर्व में ही, इतनी अधिक है गोरी, करके फिजूल खर्चे, मँहगाई न बढ़ाओ।।


topic of the week



latest from jagran