! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

629 Posts

2078 comments

शालिनी कौशिक एडवोकेट


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

Sort by:

हाईकोर्ट बेंच पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आवश्यक आवश्यकता

Posted On: 21 Sep, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

में

0 Comment

शहीदों के प्रति संवेदना का अभाव

Posted On: 19 Sep, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Celebrity Writer में

1 Comment

ऐसे ही सिर उठाएगा ये मुल्क शान से ,

Posted On: 5 Aug, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

में

2 Comments

राष्ट्रीय पुरस्कार :ड्रेस कोड बनाना ही होगा .

Posted On: 8 May, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

में

3 Comments

हर्ष फायरिंग की अनुमति है ही क्यों ?

Posted On: 30 Apr, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

में

0 Comment

तलवार अपने हाथों से माया को सौंपिये.

Posted On: 28 Feb, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

में

2 Comments

Page 1 of 6312345»102030...Last »

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

जय श्री राम आजादी के बाद से कांग्रेस ने मुस्लिम तुस्टीकरण की नीति अपनाते राजनीती करी फिर बाद में क्षेत्रीय डको ने इसका इस्तेमाल किया हमारे याह सेचुलारिसं के मायने है हिन्दू विरोधी और मुसलमानों का पक्ष लेने का.दादरी पर रोने वाले हिन्दू की केरला,कर्नाटक,उत्तर प्रदेश पच्छिमी बंगाल में हिन्दू मारे जाते सेचुलारिस्ट्स,ब्रिगेड  मूर्ख बुद्दिजीवी मानवधिकार  आयोग चुप रहते वही दादरी पर महीनो तक रोते रहे.मानवधिकार आयोग ने कैराना में पलायान को सही बतया और रिपोर्ट माँगी.ऐसे सेक्युलर नेता देश को भी बेच समाजवादी दल तो सत्ता के लिए छु प रहेगा मुसलमानों को खुश लारने की साजिस है जब कश्मीर में हिन्दू भगाए  गाये जब चुप इसीलिये मुसलमान दंगे आरी करा कर राज्य करते इससे देश कहाँ जाता किसी कोइ फिकर नहीं बुद्दिजीवी क्यों नहीं अवार्ड लौटते.ये सब विदेशी साजिस है.आभार

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

जय श्री राम शालिनी जी उरी के शहीदों के लिए पुरे देश में आक्रोश है सरकार भी बहुत गंभीर है और माकूल जवाब दिया जाएगा लेकिन ये काम टीवी में या समाचार में नहीं बतायाजा सकता.लेकिन हमारे याहन मुस्लिम तुष्टीकरण उनके वोटो के लालची नेते ने देश का सत्यानाश कर दिया.जिस तरह बिहार के अपराधी शह्बुद्दीन के छूटने पर लालू ने खुशी जताई सेकुलर ब्रिगेड चुप रहा शर्मनाक फिर कश्मीर में शरद यादव सीता राम येचुरी जिस तरह अलगाववादी नेताओ से मिलने घर गए और उन्होनो दरवाज़ा नहीं खोला कितनी बेईज्ज़ती हुई उसके बाद भी बेशर्म येचुरी कहता की हमें १९४८ की दशा में जा कर बात करना चाइये ऐसे नेता तो देश को बेच दे और पकिस्तान जनता की उसकी भाषा बोलने वाले यहा है यही हमारी कमजोरी है

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

जय श्री राम असहिष्णुता पर बहस केवल समय को बर्बाद करने के लिए की गयी और्मुसल्मानो को खुश करने के लिए क्योंकि कांग्रेस को उनके वोट चाइये कांग्रेस को अपनी सत्ता जाने का इतना गम है की वह देश की बदनामी को भी भूल गयी उसके नेता पाकिस्तान जा कर देश की बुरी करते और उन्हें संरक्षण सोनिया गांधी का मिल रहा आज महात्मा गांधी जी की आत्मा कितनी रो रही होगी.कांग्रेस सांसदों ने जो गूंद्गार्दी कर रक्खी उसकी जितनी बी निंदा हो ऍम है.सेकुलरिज्म तो यहाँ मुस्लिम तुष्टीकरण और हिन्दुओ को अपमानित करने के लिए लिया जा रहा जो सविधान का अपमान है.हिन्दुओ से ज्यादा सहिष्णुत कोइ दुसरी कम्युनिटी नहीं है मुसलमान तो यहाँ दामादो की तरह रह रहे है

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीय शालिनी कौशिक जी ! एक बहुत दुखद किन्तु आवश्यक विषय पर चर्चा के लिए धन्यवाद ! आपकी इस बात से सहमत हूँ कि इस तरह के हमलों में सजा में वृद्धि जरूरी है और ये सजा फांसी से कम नहीं होनी चाहिए ! आपकी कुछ बातों से सहमत नहीं ! पहली यह कि सरकार ने त्वरित कार्यवाही नहीं की ! सरकार की त्वरित कार्यवाही का ही नतीजा है कि पीड़ित युवती इस समय रूस पहुँच चुकी है ! आपकी यह बात भी सही नहीं है कि भाजपा के शासनकाल में यह सब ज्यादा हो रहा है ? क्या कांग्रेस के शासनकाल में इस तरह की घटनाएं नहीं होती थीं ? दिल्ली का अत्यंत दुखदायी निर्भया काण्ड कांग्रेस के ही शासनकाल में हुआ था और वो भी देश की राजधानी दिल्ली में ! यूपी में तो इस समय भाजपा सत्ता में भी नहीं है ! हर घटना पर भाजपा या कांग्रेस को कोसना ठीक नहीं है ! आप इस मंच की वरिष्ठ ब्लॉगर और बहुत जागरूक बुद्धिजीवी हैं ! आपका बहुत आदर सम्मान करता हूँ ! इस घटना के मूल में भी जाइये ! कोई भी सरकार लिव इन रिलेशनशिप के फलस्वरूप या किसी के घर के भीतर होने वाली किसी दुर्घटना को नहीं रोक सकती है ! हाँ, आपकी इस बात से पूर्णतः सहमत हूँ कि इस तरह की दुखद घटनाओं के बाद तुरंत कार्यवाही होनी चाहिए और अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए ! मंच पर एक बेहद जरुरी चर्चा करने के लिए सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

कोई भी श्रेष्ठ आत्मा सम्मान चाहती है, स्वयं के लिए भय या दिखावा नहीं । बहुत बड़ी बात कह दी शालिनी जी आपने । इन्दिरा जी के लिए दोनों ही बातें लागू हैं - उनसे लोग भयभीत भी रहते थे क्योंकि वे कठोर प्रशासक थीं और अनुचित बातों को सहन करने का मिज़ाज उनका नहीं था लेकिन साथ ही उनके प्रति सम्मान का भाव भी मन में उमड़ता था । वे सदा अपने मन की सुनती थीं तथा एक बार किसी भी निर्णय को ले चुकने के उपरांत उस पर अमल करने में उन्हें कभी कोई संकोच नहीं होता था । वे सच्चे अर्थों में लौह-महिला थीं तथा उनके विरोधी भी उनकी खूबियों की प्रशंसा किए बिना नहीं रह पाते थे । आज भारतीय जनता पार्टी में सम्मिलित हो चुकीं श्रीमती किरण बेदी को अपनी कर्मठता, कार्यकुशलता और सच्चरित्रता के प्रदर्शन का कभी अवसर नहीं मिल पाता यदि इन्दिरा जी ने उनके कार्यकाल के आरंभ में ही उनकी योग्यता को पहचान कर उन्हें वांछित समर्थन एवं संरक्षण नहीं दिया होता ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

आदरणीया शालिनी जी, निश्चित ही नेहरू-मोदी देश की महान हस्तियाँ हैं, किन्तु देश के नागरिकों की सम्यक दृष्टि में देश सर्वोपरि होना चाहिए  | कदाचित इसी दृष्टि-अभाव के कारण हम दल-दल में फँसे पड़े है | राजनीति की जैसी राजनीतिक-राजनैतिक स्वच्छता, संयोग-सहयोग देश को मिलना चाहिए वह देश के नागरिक नहीं ले पा रे हैं, क्योंकि हम व्यकित और व्यकितगत आस्थाओं के शिकार हो रहे हैं | अब नितांत वक्तिगत राय और नेताओं के व्यक्तित्व एवं कृतित्व की सीमाओं से ऊपर उठकर भारत की महानता की श्रीवृद्धि के लिए ध्यान केन्द्रित करना नागरिकों के लिए अधिक श्रेयस्कर है | हाँ, यदि किसी को नेताओं में शुमार होना है, तो बात अलग है | पर उसके लिए भी व्यक्तिवाद नहीं, राष्ट्रवाद के लक्ष्य की राजनीति उसे श्रेष्ठतर नेतृत्वकर्ता सिद्ध कर सकती है, जिसकी आज बड़ी आवश्यकता है | ...सादर !

के द्वारा: Santlal Karun Santlal Karun

आदरणीया शालिनी जी, निश्चित ही नेहरू-मोदी देश की महान हस्तियाँ हैं, किन्तु देश के नागरिकों की सम्यक दृष्टि में देश सर्वोपरि होना चाहिए  | कदाचित इसी दृष्टि-अभाव के कारण हम दल-दल में फँसे पड़े है | राजनीति की जैसी राजनीतिक-राजनैतिक स्वच्छता, संयोग-सहयोग देश को मिलना चाहिए वह देश के नागरिक नहीं ले पा रे हैं, क्योंकि हम व्यकित और व्यकितगत आस्थाओं के शिकार हो रहे हैं | अब नितांत वक्तिगत राय और नेताओं के व्यक्तित्व एवं कृतित्व की सीमाओं से ऊपर उठकर भारत की महानता की श्रीवृद्धि के लिए ध्यान केन्द्रित करना नागरिकों के लिए अधिक श्रेयस्कर है | हाँ, यदि किसी को नेताओं में शुमार होना है, तो बात अलग है | पर उसके लिए भी व्यक्तिवाद नहीं, राष्ट्रवाद के लक्ष्य की राजनीति उसे श्रेष्ठतर नेतृत्वकर्ता सिद्ध कर सकती है, जिसकी आज बड़ी आवश्यकता है |

के द्वारा: Santlal Karun Santlal Karun

के द्वारा: DR. SHIKHA KAUSHIK DR. SHIKHA KAUSHIK

प्रिय शालनी जी बहुत बात हर बात में पीड़िता को दोष देना चलन बन गया है एक तरफ नारी अधिकारों की बात की जाती है दूसरी और उसे दबाने का हर प्रयत्न किया जाता हैआज कल बीबी होते हुए भी किसी दूसरी से संबंध बनाना चलन बन गया है विरोध करने पर बीबी को इतना प्रताड़ित करते हैं देखा नहीं जाता कही बच्चों की मजबूरी कहीं आर्थिक मजबूरी कहीं जुल्म सहने की आदत महिला को जुल्म सहने के लिए विवश कर देती हैं एक पढ़ी लिखी नौकरी पेशा को उसका पति सड़क पर घसीट कर मार रहा कारण एक दूसरी महिला से उसके संबंध थे वह चाहता था यह कुछ न कहे यह चुप रहे बच्चे चीख रहे थे पूरी कलौनी थी केवल में और दो एक महिलाएं निकल कर आई बाकी सब चुप मैने कहां इन्सान हो दर्द होता है क्यों सह रही हो उसने कहा क्या करूँ शादी लायक दो बहनें हैं हमने पुलिस बुलाई पुलिस वाले कहने लगे यह शिकायत करें हम अभी अरेस्ट करते हैं पर महिला चुपचाप ऊपर चली गई वह राक्षस भी हुंकारता चला गया आप हैरान होगी वह महिला और पति बहुत अच्छी जगह नौकरी करते थे अच्छी तनखा थी महिला की तनखा उससे ज्यादा कुछ दिनों बाद पति उसे लेकर नए घर में रहने चला गया कई बार मन भारी हो जाता शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

मैं किसी भी पार्टी का सदस्य नहीं हूं। लेकिन फिर भी निवेदन करता हूं कि कृपया परिस्थितियों का आकलन कीजिए जी। यदि 'आप' कोई रैली कर रही है उसकी विधिवत रूप से पुलिस व प्रशासन से अनुमति ली गयी है। ऐसे में क्या पुलिस की सम्पूर्ण जिम्मेदारी नहीं बनती जी। ये पुलिस अपनी जिम्मेदारियों से बचती क्यों है, इन्हें काहे बात की तनख्याह मिलती है केवल रिश्वत खाने के लिए!पुलिस वाले कहते हैं कि मर जाने दो जी। न्यूज चैनल जो इसको कवर कर रहे थे क्या उनके लिए किसी की जान से भी अधिक उसकी तसवीरें उतारना ही है जिससे हो हल्ला कर सकें और टी आर पी बना सकें। जिस देश में मीडिया बिकी हो उस देश का क्या होगा, सोचकर डर लगता है। क्या भारत माता उनकी माता नहीं है जो वे इस तरह से चीर चहरण कर रहे हैं। अब तो ऐसा प्रतीत होता है कि वे अपनी माता का भी बीच चैराहे पर चीर हरण कर देंगे और टी आर पी बनाने के लिए उसे भी न्यूज बनाकर परोस देंगे। वे सौ बार झूठ को सत्य कह कर अंत में झूठ को सत्य सिद्ध करते हैं। कृपया मुझे माफ कीजिए और परिस्थितियों का वास्तविक आकलन करके सही निर्णय पर पहुंचिए जी। न्यूज चैनलों के किसी झूठे बरगलावे में नहीं आइये। हालांकि सभी मीडिया चैनल गन्दे नहीं हैं लेकिन सभी का दामन सफेद हो सकता है लेकिन उन में से कइयों की आत्मा सांप से भी अधिक काली है।मैंने यहाँ बार बार सम्मान दिखाने वाले शब्द जी का अधिक उपयोग किया है उसके पीछे भी कोई कारण हो सकता है। मैं आपके समान को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं रखता हूं।

के द्वारा: Maharathi Maharathi

टी आर पी की भूखे कुछ मीडिया के घराने क्या कर रहे थे इनकी मानवीयता कहाँ मर गयी थी। टी आर पी के लिए ये कैमरा तो चलाते रहे लेकिन एक किसान को बचाने के लिए कोई आगे नहीं आया। आज दिनांक 5.5.2015 है जी!! न्यूज चैनल (ऐसे तीन चार चैनल ही हैं, सब नहीं हैं। नाम लेना संभव नहीं है। सुधी पाठक समझदार है वे खुद पहचान लेंगे कि कौन कौन से ऐसे चैनल है, जो खुद को बहुत बड़ा लोकतंत्र का खम्भा कहते हैं। आज पूरे दिन ऐसा प्रकरण चला रहे हैं जिसका न तो कोई भी शिकायत कर्ता है नहीं कोई तथ्य। न्यायालय का अपमान कर रहे हैं खुद ट्रायल चला रहे हैं। दो भरे पूरे परिवारों (कुमार विश्वास तथा एक और) को नष्ट करने की मुहिम चला रहे हैं। यदि ये वास्तविक मीडिया हैं तो क्या इनका राजस्थान में हो रही किसानों की आत्म हत्या से कोई सरोकार नहीं है। उन्हें केवल दिल्ली की सरकार से सरोकार क्यों है। क्यों का जबाव भी है। इनमें से एक के मालिकों के समूह में एक सांसद हैं जो राजस्थान से हैं। राजस्थान में इनकी पार्टी की सरकार है, तो राजस्थान की आत्महत्याओं के बारे में ये चैनल केवल एक दो मिनट की खबर देकर चुपचाप से अपनी बात खत्म कर लेगा। अब चूंकि दिल्ली में एक खास पार्टी ने इनकी पार्टी को मात्र तीन पर रोक दिया था तो स्वयं सोचिये कि बदला लेने के हथकण्डा का कहाँ दुरुपयोग किया जायेगा। यदि ऐसे चैनल खुद को मीडिया कहते हैं तो भारत को ऐसी मीडिया की आ वश्यकता नहीं है जिसके मालिक लोग कोयला घोटाले को न दिखाने के लिए घूस लेते दिखाई पड़ते हों। देश का क्या होगा। ऐसे भ्रष्ट तथा कथित मीडिया घरानों आपको वास्तव में मीडिया शब्द की परिभाषा भी नहीं आती है, कृपया भारत पर तरस खाओ क्योंकि ये देश आपका भी है। निजी स्वार्थों और टी आर पी की दीवानगी के चलते भारत का बंटाढार मत करो। आने वाली नस्लें आपको कैसे माफ कर पायेंगी। मैं देश की जनता से अपील करता हूं कि कृपया ऐसे चैनलों का जो पत्रकारिता का अपने निजी हितों को साधने के लिए मजाक उड़ा रहे हैं, देखना बंद कर दें।

के द्वारा: Maharathi Maharathi

नारी इस स्रष्टि की वह रचना है जो शक्ति का साक्षात् अवतार है.धेर्य ,सहनशीलता की प्रतिमा है-----------असहमत अब नारी अपनी शक्ति का प्रयोग केवल ससुराल वालों को परेशान करने के लिए ही करती है / चिलचिलाती धुप में खेतों में फावड़े चलाते, रिक्शा चलाते, सीमा पर दुश्मनों से लड़ते कितने महिलाओं को देखा जाता है ? ताज़ा उदहारण --कितनी महिलाये नेपाल के विनाशकारी भूकम्प पीड़ितों के सहायता के लिए वहाँ मौजूद है ? यदि वहाँ किसी सीरियल के लिए आडिशन होता तो महिलाओं की कतार शेस होने का नाम नहीं लेता / और रही बात धैर्य की तो आधुनिक नारी सफलता की सहज उपाय खोजती रहती है / सस्ती सफलता के लिए सबकुछ दाव पर लगा देती है / ताज़ा उदाहरण -राधिका आप्टे / मैंने अपने व्यक्तिगत अनुभवों पर अपना मत प्रकट किया है / पसंद ना आये तो क्षमा चाहूँगा / मैं भी मानता हूँ की महिलाओं में योग्यता है लेकिन वे इसका गलत जगह पर उपयोग कर रही है / उन्हें सही राश्ता दिखाने की जरुरत है / और ये काम महिलाये ही कर सकती है /

के द्वारा: Rajesh Kumar Srivastav Rajesh Kumar Srivastav

आभार शालिनी जौशिक जी!...आपने अपने विचार बहुत सुंदर ढंग से व्यक्त किए है! मै समझती हूँ कि आज पंडित नेहरू, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, महात्मा गांधी और लोकमान्य तिलक जैसी...देश को अंग्रेज शासकों से आजादी दिलवाने वाली महान हस्तियाँ जीवित नहीं है....तो उनके कार्य या कार्यक्रमों की छानबीन किसलिए की जानी चाहिए?...सच्चाई साफ तौर पर सामने लाने के लिए प्रमाणों की जरुरत पड़ती है जो इतने वर्षों के अंतराल में मिलने, तकरीबन असंभव है!...अत: नेताजी की मृत्यु को चर्चा का विषय बनाना न्यायपूर्ण नहीं है!..और इन महान देशभक्तों के वारिस अपने स्वयं के कर्मों के आधार पर जनताकी प्रशंसा या नाराजगी झेल रहे है!..उनकी चर्चा होना स्वाभाविक ही है!...

के द्वारा: arunakapoor arunakapoor

आभार शालिनी जौशिक जी!...आपने अपने विचार बहुत सुंदर ढंग से व्यक्ति किए है! मै समझती हूँ कि आज पंडित नेहरू, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, महात्मा गांधी और लोकमान्य तिलक जैसी...देश को अंग्रेज शासकों से आजादी दिलवाने वाली महान हस्तियाँ जीवित नहीं है....तो उनके कार्य या कार्यक्रमों की छानबीन किसलिए की जानी चाहिए?...सच्चाई साफ तौर पर सामने लाने के लिए प्रमाणों की जरुरत पड़ती है जो इतने वर्षों के अंतराल में मिलने, तकरीबन असंभव है!...अत: नेताजी की मृत्यु को चर्चा का विषय बनाना न्यायपूर्ण नहीं है!..और इन महान देशभक्तों के वारिस अपने स्वयं के कर्मों के आधार पर जनताकी प्रशंसा या नाराजगी झेल रहे है!..उनकी चर्चा होना स्वाभाविक ही है!...

के द्वारा: arunakapoor arunakapoor

के द्वारा: DR. SHIKHA KAUSHIK DR. SHIKHA KAUSHIK

पश्चिम उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट की पीठ या अलग प्रदेश बेहतर ? हाईकोर्ट की पुरानी मांग फिर चल पड़ी है, अलग प्रदेश की मांग अभी ठंडी है जबकि एक तीर से ही दो बल्कि दस ‘शिकार’ हो सकते है!...उसी पुरानी जनचर्चा को निम्न बिन्दुओं में दोहरा रहा हूँ :- • अलग राज्य बनने से सिर्फ पीठ नहीं बल्कि पूर्ण हाईकोर्ट की स्थापना स्वत: ही हो जायेगी. • अलग डीजीपी, मुख्य सचिव, सीएम से लेकर हर इकाई के दो मुखिया बन जायेंगे. • यानि सिर्फ न्याय ही नहीं कानून, शासन, राजनैतिक जिम्मेदारी आधी-2 और समय-संसाधनों का पूरा उपयोग. • प.उ.प्र. का राजस्व या संसाधन पूर्वी उ.प्र. में लुटने से बचेगा, जैसे प.उ.प्र. में बिजली की यदि 15-20% चोरी होती होगी तो दबंगो के क्षेत्र पूर्वी उ.प्र. में 80-85% चोरी नहीं बल्कि डकैती होती है. • पू.उ.प्र. का भाग बिहार जैसे विकासशील राज्य से मिलता है तो प.उ.प्रदेश का भाग दिल्ली एन.सी.आर. जैसे विकसित क्षेत्र से मिलता है. • नयी विधान सभा में नए नियम प.उ.प्र. की धरती, संस्कृति की जरूरत के मुताबिक बनेंगे. • ...और भी बहुत कुछ. लेकिन राज्य के दो भाग होना जरुरी है या नहीं ये खुद से इन दो प्रश्न के बाद तय करिए – (१) यदि आप उत्तर प्रदेश के बीचोंबीच किसी जनपद के निवासी है और आपकी बहन/बेटी के लिए पसंद के रिश्ते पू.उ.प्र. और प.उ.प्र. दोनों तरफ से हों तो आप किस ओर ब्याहना पसंद करेंगे? (२) आपकी बहन/बेटी की उच्चशिक्षा अथवा बतौर बीटीसी शिक्षिका पू.उ.प्र. के जौनपुर, देवरिया, गोरखपुर अथवा प.उ.प्र.के आगरा, मथुरा, नॉएडा में चयन करना हो तो आप किधर चयन करेंगे? लेकिन इस बात से इंकार नहीं की ईमानदार इच्छाशक्ति के बगैर दुश्वारियां भी कम नहीं किन्तु चार बच्चों के पालन से दो कहीं ज्यादा बेहतर पल सकेंगे बस यही मंशा है उपरोक्त प्रस्ताव में. – (शिब्बू आर्य, मथुरा)

के द्वारा: sk78 sk78

शालिनी जी आपका सम्पूर्ण आक्रोश रजस्वला स्त्री के अधिकारों पर है | रजस्वला क्यों अछूत है ,इसका वैज्ञानिक आधार यौन संबंधों से होता है | इस अवस्था मैं यौन सम्बन्ध यौन रोगों का कारण हो सकता है ,गन्दा रक्त इन्फ़ेक्सन का कारण हो सकता है । वर्तमान समय अन्य सुगम साधन सामान्य जीवन प्रदान कर रहे हैं किंतु ब्रम्हचर्य हितकारी ही रहता है । रहा धर्म ...धर्म ऩे भी ऐसी स्त्री को अछूत इन्हीं कारण वस माना है । हर धर्म कार्य के लिए मन की एकाग्रता ,स्वच्छता को आवश्यक माना जाता है । गंदगी के साथ यौनेच्छा भी प्रबल होती है । अतः ऐसी स्त्री को काव्यात्मक तुलना की गयी । जहाॅ तक पुरुष की शुद्धी का है पुरुष को भी हर धार्मिक आयोजन मै ब्रम्हचर्य का पालन आवश्यक है । सन्ध्या बन्धन मैं इसी यौन सम्बंधो की शुद्धी होती है । और प्राणायाम के पस्चात ही मन एकाघ्र होता है । जब धर्म को माना जाता है तो उसके नियमों का पालन उचिल ही होता है । स्त्री को उसकी शारीरिक संरचना के अनुसार ही धर्म कर्म से जोडा गया । यज्ञोपवित (जनेऊ) को भी ईसी कारण स्त्रीयों को बर्जित किया गया । रजस्वला होने पर यज्ञोपवित अपवित्र होता रहेगा । अपवित् जनेऊ एक धागे सा होता है । धार्मिक नियम भी किसी वैज्ञानिक आधार पर ही बनाये जाते हैं ,समयानुसार उनमैं सुधार भी होते रहते है । आपका लेख उत्क्रष्ट जानकारी पुर्ण है । बधाई ।ओम शांति शांति

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

शालिनी जी, ब्लॉग के शीर्षक से कुछ अच्छा और सार्थक पढ़ने की आशा से ब्लॉग खोला, जैविक जानकारी निःसंदेह अच्छी है लेकिन धर्म से जुडी बातें इतनी गलत जानकारी के साथ आप कैसे लिख पाती हैं मुझे पता नहीं; काश की पुरुष मन की गन्दगी को प्रकट करने में आप पी.के. परिपाटी का पालन न करके उसी वैज्ञानिक परिपाटी का पालन करतीं जो डॉ. नीलम ने सही तरीके से दर्शाई हैं| किसी देव या धर्म का फर्जीनामा प्रस्तुत करना अशोभनीय है वैसे भी हिंदुत्व के साथ तो कोई भी जिन कर ले कौन सा किसी को डर लगा है वर्ना फ़्रांस की न्यूज़ तो अपने सुनी ही होगी :) आपका डर भी जायज है शुक्र मनाइये उस धर्म की अच्छाई का जिसने आपको निर्भय(।) कर रखा यही वर्ना आपको भी कुछ कहना का मलाल(।) जरूर होता| खैर छोड़िये आपकी गलत जानकारी के लिए आपको डॉ. राधाकृष्णन (शायद आप उसे ज्यादा ज़हीन हो और उनकी बात भी आपको गलत लगे) की अध्ययन संपन्न राय बता देता हूँ- "पुराकल्पेषु नारीणां, मंदिरः वंदना निश्चितः। अध्यापना च वेदानां, गायित्री वचनं ततः ।।" उपरोक्त पर भी आपकी राय चाहूँगा...... :) प्रतिक्रिया कड़वी है लेकिन आप स्त्री हैं अतः आपका सम्मान है ... सादर !!!

के द्वारा: chaatak chaatak

के द्वारा: DR. SHIKHA KAUSHIK DR. SHIKHA KAUSHIK

के द्वारा: Madan Mohan saxena Madan Mohan saxena

के द्वारा: smtpushpapandey smtpushpapandey

के द्वारा: DR. SHIKHA KAUSHIK DR. SHIKHA KAUSHIK

के द्वारा: रमेश भाई आँजना रमेश भाई आँजना

शालिनी जी, लिव इन रिलेशन पर आपके विचार अच्छे लगे| नर और नारी यदि एक साथ एक ही छत के नीचे रह रहे हैं तो वो सिर्फ साथ रह रहे हैं और उनमें किसी प्रकार का शारीरिक स्पर्श/सम्बन्ध न हों ऐसा नहीं हो सकता| लिव इन में भी शारीरिक सम्बन्ध बनते ही हैं, और यहीं शुरू हो जाता है, पुरुष की उदासीनता का खेल| इस तरह के संबंधों के टूटने से जहाँ पुरुष को कोई फर्क नहीं पड़ता वहीँ नारी के लिए ये एक अनंत त्रासदी का आरम्भ है| आजकल की भौतिकवादी भागदौड़ की जिंदगी में जहाँ आज का युवा इस तरह के बंधन रहित रिश्तों को अपना रहा है वहीं कल इनके परिणामों को भोगने के लिए भी समाज को तैयार रहना पड़ेगा| आशा है की आपका लेख लोगों तक पहुँच कर जनजागरण का कार्य करे|

के द्वारा: अवी अवी

शालिनी जी , बेहद प्रभावशाली आलेख लिखा है । जीवन के तमाम पक्षों को बेहद गहराई व संतुलन के साथ आपने प्र्स्तुत किया है । यह एक पठनीय आलेख है इसे सभी को एक बार अवश्य पढना चाहिए । आपके लेख का आखिरी पैरा उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो लिव इन रिलेशन की पैरवी करते हैं ...दर-असल इस रिश्ते का यही सच है जिसे कुतर्कों से झुटलाया नही जा सकता ......आज का युवा उन्मुक्त ज़िंदगी का आदी हो रहा है .दबाव से बचने में लगा है ,अपनी पसंद को सर्वोपरि रखता है ,हर चीज़ पैसे से खरीदना चाहता है और चिंता ,जिम्मेदारी से मुक्त ज़िंदगी का चयन करते हुए लिव इन को सकारात्मक नजरिये से देख रहा है जो निश्चित रूप से भारतीय संस्कृति पर चोट है - इस अच्छे आलेख के लिए आपको बधाई ।

के द्वारा: एल.एस. बिष्ट् एल.एस. बिष्ट्

शालनीजी आपने एक बहुत ही जरूरी विषय की और ध्यान खींचा है. इसके लिए आप धन्यवाद कि पात्र हैं. खेलकूद तभी आगे बढ़ सकते हैं जब वो दूर दराज के गाँव तक हमारी नई पढ़ी को आज की दुनिया में हो रही प्रगति को शीघ्र से शीघ दिखा और उससे भी अधिक दिखा सकें. आपको एक और समस्या की और ले चलता हूँ - विविध भर्ती का प्रसारण DTH (Directo To Home) aur FM पर होने के बावजूद अगर आप प्रसारण को सुनें तो अक्सर रो दे ने का मन करता है. वहीँ अगर आप रेडियो मिर्ची सुनें तो प्रसारण की गुणवत्ता कितनी सुन्दर मिलती है. मुझे अक्सर प्रतीत होता है की ये सब कुछ जान भुज कर किया जा रहा है जिससे कि विविध भारती के श्रोता divert हो जाएँ? पता नहीं ऐसा इस देश में ही क्यों होता है. सुभकामनाओं के साथ ..Ravindra K Kapoor

के द्वारा: Ravindra K Kapoor Ravindra K Kapoor

के द्वारा: abhishek shukla abhishek shukla

आदरणीया शालिनी जी ! आपने अपने पूर्वाग्रहों के अनुसार ही लेख लिखा हैं ! सब जानते हैं कि सानिया मिर्जा अब पाकिस्तान की बहू हैं ! पाकिस्तान को आपने भारत का भाई कहा है,जबकि उसकी सारी हरकतें दुश्मनी वाली होतीं हैं ! एक जगह आपने लिखा है-जिस पद के योग्य इस बार सुषमा स्वराज जी थी उस पर नरेंद्र मोदी जी को सुशोभित किया गया है ! आपको कैसे मालूम कि मोदी जी योग्य नहीं हैं ! भाजपा ने उन्हें सबसे योग्य समझा होगा,तभी तो उन्हें प्रधानमंत्री बनाया है ! राजनीती में अबतक असफल रहे राहुल गांधी भविष्य में यदि देश के प्रधानमंत्री बन जाएँ,तो क्या आप ये सच कह पाएंगी कि कांग्रेस में इस पद के लिए अनेकों उनसे कहीं ज्यादा योग्य व्यक्ति हैं ! आप देखेंगी कि आने वाले समय में मोदीजी देश का सर्वांगीण विकास कर एक ऐसा इतिहास रचेंगे,जो पिछले ६७ सालों में भी नहीं रचा जा सका है !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: deepak pande deepak pande

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

के द्वारा: DR. SHIKHA KAUSHIK DR. SHIKHA KAUSHIK

शालिनी जी आपने आपने बहुत सुन्दर भाव पूर्ण कविता लिखी है |आपने फादर डे पर मैने लेख लिखा था उस में एक प्रश्न उठाया था क्या हमारे यहां लडकिया पैर छूती हैं शालिनी जी मेरे दिमाग में सदा रहा है लड़के लड़की में कोई फर्क नहीं है बेटी भी अपने माता पिता के पैर छूसकती है भगवान ने मुझे ऐसी बेटी दी है या उसको इस तरह से अधिकार दिया जिसको जन्म दे कर मैं धन्य हो गई हम दोनों की इच्छा है हम जब दुनिया से जाएँ मेरी बेटी भी हमें कंधा दे मेरी बेटी के बाद परिवार में जिसके भी यदि एक ही लड़की है या दो हैं लड़का नही है किसी को कोई अफ़सोस नहीं है घर की बेटियांपरिवार में बड़ों के सम्मान में पैर छूती हैं हम अपनी बच्चियों को बहुत प्यार दुलार से पालते हैं में सोचती हूँ यही स्वस्थ सोच समांज में अब हो जानी चाहिए डॉ शोभा भरद्वाज

के द्वारा: Shobha Shobha

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

महोदया जी ,.....कृपा करके कुछ ऐसे देशों के नाम बता दीजिये जहां मुसलमान सुरक्षित महसूस करते हों ....?श्री मान जे एल सिंह की भी प्रतिक्रिया पढ़ कर ऐसा लगा की हिन्दू बहुसंख्यक हो कर भी इन पर विश्वास नहीं कर पा रहा है ? एक दो अमीर देश जैसे सऊदी अरेबिया में भारत और अन्य देशों से गरीब मुस्लिम अपने देशों में भेड़ें चरवाने का काम करवाते हैं मेरे जानकारी यहां तक है की बाकायदा बंधुआ मजदूर बनाया जाता है इतनी अमीरी होने केबाद भी खाने तक को ठीक से नहीं दिया जाता ! अर्थात ये कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं कई जगह मुसलामानों के हुलिये जैसे दिखने के कारण सरदारों को भी निशाना बनना पड़ रहा है वो भी पश्चिमी देशों में ....? आप का विश्लेषण बेहद घटिया है हिंदू कभी भी धर्म के आधार पर फर्क नहीं करता....... रही बात छुआ छूत की तो ऐसा तो मेरे घर में भी है मेरी बीबी शाकाहारी है और मैं व मेरे बच्चे मांसाहारी और अक्सर वो मेरा और बच्चों का छुआ खाना और पानी नहीं पीती.........मैं मानता हूँ ये ढकोसला है लेकिन मैं उसकी मान्यताओं को क्यों ठेस पहुंचाऊं....? .......लेकिन इसे साम्प्रदायिकता नहीं समझा जा सकता ! किसी मूर्खता भरी सोच को मुसलमानों के साथ जोड़ कर देखने मात्र से कोई आदमी समझदार और लेखक नहीं हो जाता ! ऐसा करके आप सामाजिक गन्दगी या अपने मन में भरी गन्दी सोच को तुष्ट कर रहे हैं .........धन्यवाद

के द्वारा: dhirchauhan72 dhirchauhan72

, प्रिय हाय यह तुम बैठक खुशी है, मैं एन बेन हूँ, मैं अमेरिका के संयुक्त राज्य से, एक संयुक्त राज्य सेना अधिकारी हूँ सहायक और देखभाल कर रहा हूँ, एक अच्छा दोस्त पाने के लिए इंतजार कर रही है, मेरी निजी ईमेल बॉक्स के माध्यम से हमारी बातचीत जारी है कृपया, यहाँ मेरा ईमेल पता (annben1@hotmail.com) मैं अपने आप को बेहतर शुरू करने और मैं आपके मेल प्राप्त होते ही मेरी तस्वीर भेज देंगे. , मैं आप के साथ संपर्क में आते हैं और मैं वास्तव में कारण मेरा कर्तव्य तुम्हारा की हालत को मेल लिखने के लिए मैं हमेशा उपलब्ध नहीं हूँ, हालांकि मेरी रुचि इंगित करने के लिए इच्छा एन. Hi dear, It is my pleasure meeting you, I am Ann Ben, I am a United State Army officer, from united state of America, am supportive and caring, looking forward to get a nice friend,Please let continue our conversation through my private email box, Here is my email address ( annben1@hotmail.com ) I will introduce myself better and send you my picture as soon as i receive your mail. I come in contact with you and I really wish to indicate my interest although i'm not always available to write mail due to the condition of my duty Yours, Ann.

के द्वारा: ann0000 ann0000

के द्वारा: DR. SHIKHA KAUSHIK DR. SHIKHA KAUSHIK

शालिनीजी, पहली बात तो ये की सोनिया जी केवल युपीए की चेयरपर्सन ही नहीं थीं बल्कि राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की अध्यक्ष भी थीं उसको कैबिनेट मंत्री का दर्ज प्राप्त था और उसके सैलरी सहित समस्त व्यय पीएमओ करता था इसलिए आपका ये कहना बेमानी है की वो मंत्री नहीं थीं जबकि वो तो प्रधानमन्त्री तक निर्देशित कर रहीं थीं। ये कहना सही है की हर मामले में सोनिया और राहुल का उदाहरण ठीक नहीं है परन्तु मैं आपको स्पष्ट सकारात्मक उदाहरण देता हूँ शायद कांग्रेस मोह से निकल कर आप सोच सकें भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के पास किसी संस्थान की कोई स्कूली शिक्षा और डिग्री नहीं थी परन्तु फिर भी विद्वान थे क्योंकि उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा मदरसों में ली और विभिन्न भाषाओं का ज्ञान शिक्षकों से टूशन लेकर प्राप्त किया। और भारत में आई आई टी की स्थापना करवाई। यदि एक ऐसा व्यक्ति जिसने स्कूली शिक्षा ही न ली हो और शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो सकता है तो स्मृति ईरानी में क्या बुराई है आप सभी ने उन्हें राज्य सभा में बोलते और बात करते सुना है टीवी पर भी सुना है किस आचरण से वो किसी भी डिग्रीधारी कमतर लगतीं हैं, कम से कम कपिल सिब्बल जैसे हार्वर्ड रिटर्न से तो अच्छी ही हैं वो तो बात भी करते हैं तो लगता है की कोई अनपढ़ या अन्य देश का व्यक्ति है। उनको उनका काम करने दीजिये हो सकता है वो मौलाना आज़ाद की तरह कुछ अच्छा करें। और इस से ज्यादा स्थिति खराब तो वो कर नहीं पाएंगी जितने की आपके पढ़े लिखे सिब्बल साहब कर गए

के द्वारा: munish munish

के द्वारा: शिल्पा भारतीय "अभिव्यक्ति" शिल्पा भारतीय "अभिव्यक्ति"

के द्वारा: शिल्पा भारतीय "अभिव्यक्ति" शिल्पा भारतीय "अभिव्यक्ति"

अब कोसने से कोई फायदा नहीं है काम हो चुका है ......जिसे जो चाहिए था मिल चुका है ! वाड्रा को जमीन , एन डी तिवारी को बेटा , मनु सिंघवी और दिग्विजय को आप समझ सकतीं है ......सोनिया गांधी और बाकी कोंग्रेसीभी अपना अपना मतलब निकाल चुके है कोयला से ले कर जितने घोटाले किये सारे मालामाल हो चुके है शीला दिक्षित जो जेल जा रहीं थीं राज्यपाल बन गयी हैं और क्या चाहिए ...? मनमोहन जी अब शायद ही किसी काम के बचे थे ....राहुल बाबा भी जनता की मूर्खता बनी रही और मोदी ने भी कोंग्रेश की तरह वेवकूफ बनाया तो अगली बार प्रधानमंत्री बन जाएंगे ! प्रियंका अगर वाड्रा बनी रहीं तो भले ही रह जाएँ वरना वो भी प्रधानमंत्री बन जाएंगी .......थोड़ा इन्तेजार तो बनता है .......कितना लूटेंगे ....? थोड़ा आराम हो जाए तब तक दिग्विजय की शादी के मजे लो और राहुल बाबा जिनको भरी महफ़िल में पप्पियाँ मिल रहीं हैं अच्छा नहीं लगता शादी वादी करवाओ .....थोड़ा पोंगापन दूर हो !... जनता है फिर मूर्ख बनेगी ......बिना टेंशन के मस्त रहो ४-५ साल मजे लो छुट्टियां मनाओ ! जनता पर छोड़ दो ये जनतंत्र है राजा शाही तो नहीं ....? लालची और जल्द्बाजों का क्या हस्र होता है इंदिरा और राजीव से कोंग्रेसियो को सीखना चाहिए ! ये सब कुछ नहीं है एक समय चक्र है .......लेकिन अबकी बार मोदी सरकार !!!

के द्वारा: dhirchauhan72 dhirchauhan72

के द्वारा: DR. SHIKHA KAUSHIK DR. SHIKHA KAUSHIK

के द्वारा: DR. SHIKHA KAUSHIK DR. SHIKHA KAUSHIK

आदरणीय शालिनी जी, राजनीति का स्तर बेहद गिर गया है . जिस तरह की आज छींटाकसी हो रही निश्चित ही ऐसी पहले कभी नहीं हुई. हाँ ये जानकार आपको जरूर कष्ट होगा की ये सब नरेंद्र मोदी ने शुरू नहीं किया बल्कि स्वयं सोनिया गांधी ने ही शुरू किया था और उस से पूर्व भी इस तरह की गलत भाषा का प्रयोग कांग्रेसी करते रहे हैं लेकिन पलटकर उनको जवाब पहली बार मिल रहे हैं, इसलिए बेचारे सभी कांग्रेसी परेशान हैं. की उनको जवाब क्यों दिया जा रहा है. आप भूल रहीं हैं या हाँ ये गांधी परिवार की भक्ति हो सकती है की प्रथम पुरुष, महिला, परिवार का दर्जा राष्ट्रपति को दिया गया है ये सोनिया गांधी का परिवार कैसे प्रथम हो गया

के द्वारा: munish munish

के द्वारा: Dr.Swastik Jain Dr.Swastik Jain

दोस्तों वैसे सभी लोगो कि अपनी अपनी सोच होती है और उसे बदलना इतना आसान नही होता , चलो में आपकी बात मानलु 1 मिनट के लिए तो आप ही बताइये किसकी सरकार आनी चाहिए :- १ : कांग्रेस जो १० साल से राज कर रही है और मनमोहन जैसा PM दिया जो किसी काम का नही , जिसमे न जाने कितने घोटाले हुए , कितने दंगे हुए , कितनी महगाई हुयी, कितने बलात्कार हुए , कितने फोजियो के सर कट गए, इमाम बुखारी जिस के खिलाफ नॉन जमानती वारंट है खुले घूम रहे है और संत महात्माओ पर जोर दिखाया जा रहा है , हर दिन पनडुब्बियों में विस्फोट होता है, देश चीन के सामने कमजोर पड़ गया है .... अगर में लिखना सुरु करदु तो ख़त्म ही नही होगा etc . २. आम आदमी पार्टी जो लड़ाई में दूर दूर तक नही है . ३. सपा , बसपा etc जो सिर्फ muslims या कुछ लिमिटेड वर्ग के बारे में सोचते है. दोस्तों लोग सोचते है कि मोदी के आने से दंगे होंगे वो लोगो को मरवाएगा , लेकिन ऐसा नही होगा क्योंकि : १. दंगे तब होते है जब totally मुस्लिम्स supported govt (like SP, BSP, Congress etc ) आती है . आप history उठा लेना 99.99 % दंगे मुस्लिम सुरु करते है न कि हिन्दू . 2. अगर बात विकास कि जाये तो गुजरात के विकास कि पूरी दुनिया मुरीद है . ३. चुनाव हर 5 साल में आते है , अगर मोदी का काम अच्छा न लगे तो फिर वोट पड़ेंगी, ये तो नही है कि फिर कभी चुनाव नही होंगे . जब ham ६० साल कांग्रेस को दे सकते है तो सिर्फ ६० महीने ही तो मोदी मांग रहा है. और में अपनी बात ख़त्म करते हुए ये कहना चाह रहा हूँ कि , तानाशाही वहा होती है जहाँ लोकतान्त्रिक प्रजातंत्र नही होता . भारत १ ऐसा देश है जहाँ सरकार हर 5 साल में चुनी जाती है, और सरकार के ऊपर राष्ट्रपति , surpeem कोर्ट बैठे है , तो तानाशाही का तो सवाल ही पैदा नही होता . इस बार vote for change............. vote for Modi............ !! 1 बार सेवा का मौका जरुर दें . आपकी वोट आपकी सरकार ... मोदी सरकार !! धन्यवाद !

के द्वारा: Durgesh Kumar Durgesh Kumar

प्रिय शालिनी जी, कृप्या इन बिन्दुओं पर ध्यान दें और पूरी जांच करनें के बाद ही अपना वोट डालें। • गुजरात में अमित जेठवा जैसे RTI कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी जाती है, जिसमें भाजपा के नेताओं के नाम स्पष्ट रुप से शामिल हैं। • गुजरात में 10 साल तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की गई। जब राज्यपाल ने लोकायुक्त को नियुक्ति किया तो राज्य सरकार ने इसको किसी भी तरह से रोकने के लिए मुक्द्दमें में 45 करोड़ खर्च किए। • Supreme Court ने गुजरात सरकार की मंत्री आनंदी बेन पटेल को एक जमीन आवंटन के मामले में दोषी पाया पर वो आज भी गुजरात सरकार में मंत्री बनी हुई हैं। • 400 करोंड़ के मछली पालन घोटाले में कोर्ट द्वारा दोषी पाए गए पुरुषोत्तम सोलंकी गुजरात मंत्रीमंडल को आज भी सुशोभित कर रहे हैं। • भ्रष्टाचार के मामले में जेल यात्रा कर चुके यदुरप्पा को भाजपा पार्टी में फिर शामिल किया। चुनाव के शोर में सच कई बार सुनाई नहीं देता खासकर जब शोर करने वाला झूठ बोलने में माहिर हो। राम कृष्ण खुराना

के द्वारा: R K KHURANA R K KHURANA

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

एक अनपढ़ पप्पू जिसे ये नहीं पता देश क्या होता है ...समाज किसे कहते है ...गरीबी क्या होती है ...और आज तो सुब्रमणियम स्वामी ने चेलेंज किया है कि अपना नामांकन फ़ार्म भर के दिखाए दे राजनीति छोड़ देंगे ! उसके चाहने वालों का दुःख देख कर अजीब लगता है ! बात तकलीफ देने वाली हो सकती है क्योंकि कोई काम जानता नहीं ...पड़ा लिखा है नहीं कोई नौकरी भी नहीं कर सकता चोरी के पैसों से घर तो चल जाएगा लेकिन बिना राजनितिक ताकत के कोई गलत काम तो किया नहीं जा सकता जीजाजी को कैसे तबेले से निकाल कर एक बिजनेसमेन बना दिया ये भी सम्भव नहीं है अगर मोदी आ गया तो स्विस बैंक के खाते भी न खोल दिए जाएँ ........ये सब छोड़िये शालिनी जी आप अपना राग विलाप रटिये देश को और भी आगे जाना है कोई खरीद नहीं लिया है इन चोरों ने !

के द्वारा: dhirchauhan72 dhirchauhan72

आप की टिप्प्णी "भ्रस्टाचार एक मुद्दा" पढ़ा। मै आप से किसी हद तक इतिफाक रखता हूँ। मेरे विचार से देश में भ्रस्टाचार अपना पूरा - पूरा प्रभाव बना चूका है,और भाविष्य में यह अपनी पराकास्ठा पार करता दिखेगा - जिस के रूप की किसी एक सीमा के अंदर कल्पना नही की जा सकती। भ्रस्टाचार को हम भोजन में - जैसे नमक का महत्व होता है, ठीक उसी रूप में यह सारे समाज में ब्याप्त है , वह शहर हो अथवा गांव या फिर कुछ और। वर्त्तमान में देश में इसके बिना जीवन ही रसहीन हो चुका है।लेकिन ज्यों - ज्यों इस की मात्रा बढ़ती जा रही है - इस से मिलनेवाला स्वाद भी कुटिल होता जा रहा है। लोग अब मजबूर है इसे ग्रहण करने को। जल्द ही समय आने वाला है,जब इस की (नमक ) अधिकता यवम निरंतरता के दुष्परिणाम शरीर को किसी असाध्य रोग से ग्रसित कर देंगे,इस अवस्था में इस रोग की आंशिक चिकत्सा शैल क्रिया द्वारा शायद सम्भव हो सके अथवा केवल मृतु ही इस का परिणाम हो। अतः भ्रस्टाचार एक अत्यंत ही गम्भीर मुद्दा है। इस पर अंकुश लगते ही, देश का उत्थान स्वतः ही होने लगेगा, बिना किसी अतरिक्त संसाधनों के ही। तात्पर्य है, भेजे गए 100 /- जब अपने गंतब्य तक 80 /- ही पहुँच जायेंगे, तो भारत को 'सोने की चिड़िया' होने से कोइ भी नहीं सकेगा।

के द्वारा: brijeshprasad brijeshprasad

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

शालिनी जी आपने कविता लिखी बहूत अच्छी थी परन्तु भावों पर मुझे एतराज है हमलोग जब विदेश जाते है डालर कमाने जाते आज भी टेक्नोलोजी में हम पिछड़े हैं उस डालर से बहूत कुछ हमारे देश में आता है डोलर न होने पर कच्चा मॉल यहाँ से जायेगा एक बार चद्रशेखर के समय हम अपने देश का सोनी बेचने पर मजबूर हो गये थे रहा सवाल बलिदान का कितने लोगों ने शहादत दी है उसका फल उन्हें क्या मिला देश का उच्च पद ,याकिंग मेकर है सोनिया गाँधी इस देश की सियासत को गवर्न करती है |देश चलाना एक कूटनीतिक विषय है कोइ भारत पर अहसान नहीं किय कई देशो मे विदेशी ओरते विवाह क्र आई है देश नहीं सोप दिया आज का समय सबसे खराब है बेरोजगारी मंदी एक मज्बूत सरकार की जरूरत जरूरत है और मजबूत प्रधान मंत्री की जरूरत है

के द्वारा: Shobha Shobha

के द्वारा: jlsingh jlsingh

शालिनी जी आप तो अधिवक्ता हैं कानून का ज्ञान आपको नहीं तो और किसे होगा .आपने अपने आलेख से एक महत्वपूर्ण समस्या कि तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित करने का काम किया है पर अफ़सोस तो इसी बात का है हम भारतीय कानून को तोड़ने में ही अपना गर्व समझते हैं खासकर युवा वर्ग आज जरूरत है इन युवाओं को सही गलत का ज्ञान कराया जाए जिस खुशी के इजहार से पास पड़ोस के लोगों को असहनीय एवं भारी असुविधा होती हो उसको नियमानुसार ही ब्यक्त करना चाहिए तेज ध्वनी किसको सहन हो सकती है बहुत लोगों कि श्रवणशक्ति जाती रहती है अतः इसे वर्जित करना इस पर रोक लग्न निहायत जरूरी है . एक अर्थपूर्ण आलेख .मेरी ओर से आपको सपरिवार होली कि ढेर सारी(अग्रिम ) बधाई शुभकामनायें

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

के द्वारा: ashfaqahmad ashfaqahmad

के द्वारा: ashfaqahmad ashfaqahmad

के द्वारा: Shobha Shobha

के द्वारा: yamunapathak yamunapathak

के द्वारा: yamunapathak yamunapathak

के द्वारा: Ritu Gupta Ritu Gupta

के द्वारा: ADVOCATE VISHAL PANDIT ADVOCATE VISHAL PANDIT

के द्वारा: Pankaj Kumar Mishra Vatsyayan Pankaj Kumar Mishra Vatsyayan

के द्वारा: Pankaj Kumar Mishra Vatsyayan Pankaj Kumar Mishra Vatsyayan

के द्वारा: DR. SHIKHA KAUSHIK DR. SHIKHA KAUSHIK

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

आदरणीया शालिनी जी, सादर अभिवादन! कांग्रेस के विरोधी भी इस बात को जानते हैं कि राजनीति तो कांग्रेस को ही होती है और इसने कर के दिखाया है ६० साल का शासन, औद्योगीकरण, गरीबी हटाओ, पढ़ना लिखना सीखो, (शिक्षा का अधिकार), महिला सुरक्षा बिल, सूचना का अधिकार, एफ डी आई, न्यूक्लिअर डील, खाद्य सुरक्षा बिल, लोकपाल बिल ये सभी उदाहरण हैं. केजरीवाल को भ्रमित करना, जे डी यु को एन डी ए से अलग करवाना ...ये सभी तत्काल दीखते ही हैं उसके बाद तेलंगाना बिल (आपके अनुसार) ...और वो कहते हैं कांग्रेस मुक्त भारत....प्रधान मंत्री के भावी उम्मीदवार .... कपिल सिब्बल का घोषणा पत्र कार्यक्रम में अचूक जवाब और अंत में कविता ...क्या क्या गिनाऊँ ? . राजनीति तो कांग्रेस को ही होती है...

के द्वारा: jlsingh jlsingh

हा..हा..हा..शालिनी जी, आप बड़ी शालीनता से यह सिद्ध करना चाहती हैं कि कांग्रेस में जो "गुण" हैं, वे कम या अधिक मात्रा में सभी पार्टियों में हैं, इसलिए हमें कांग्रेस का विरोध करने का कोई अधिकार नहीं है। वाह ! आप वकील हैं। यह बताईये कि क्या यह दलील न्यायालय में चल सकती है? नहीं न ! अगर भाजपा के एक नेता ने १ लाख कि रिश्वत ली और वे पकड़े गये तो आपके अनुसार कांग्रेस को करोड़ों-अरबों-खरबों के घोटाले करने का अधिकार मिल जाता है और भाजपा को उस पर उंगली उठाने का कोई अधिकार नहीं है। आपकी सारी दलीलें खोखली हैं। कांग्रेस इन सारे अवगुणों की खान है, जबकि दूसरी पार्टियों में ये अवगुण कम मात्रा में हैं। इसलिए कुतर्क छोड़कर तार्किक बात कीजिये।

के द्वारा: विजय कुमार सिंघल विजय कुमार सिंघल

भाजपा या मोदी कोंग्रेश को वंश वादी पार्टी बताते हैं तो मुझे भी दुःख होता है क्योंकि वंश क्या होता है ये अगर एक भारतवासी न समझे तो बेकार है और गांधी परिवार जिसे वंश कहा जाये तो मूर्खता ही है !................गांधी वंश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जिसने अपना उपनाम (नेहरू) तक बेटी को देना उचित नहीं समझा ..........और दूसरी प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरागांधी जिसने अपनी विधवा बहु को घर से निकाल दिया क्योंकि वो एक हिन्दू थी .............और तीसरे प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने देश की किसी बेटी तथा हिन्दू और मुस्लिम जो की उनके विरासत के साथ जुड़े थे उनसे रिश्ता नहीं रखा और ईसाई धर्म कबूल किया फिर एक विदेशी से शादी की .............इसके बाद भी आप ये भी देखिये प्रियंका को भी राजनीति से बाहर करने में देर नहीं लगाईं क्योंकि उसने एक देशी भले ही ईसाई है से शादी की ...........लेकिन गांधी क्यों चिपका रखा है ये मुझे समझ नहीं आता ! गांधी आज इनके लिए भारत के नोटों के ऊपर छपी प्रतिमा की तरह है जिसे इन्होने अपने ऊपर भी छाप रखा है मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूँ जिस दिन प्रियंका वाड्रा कोंग्रेश को सँभालने का जिम्मा लेंगी इनका नाम भी प्रियंका गांधी होगा वाड्रा ख़त्म हो जाएगा ! इनके खानदान का कौन वारिस बनेगा ये भी तय करने का अधिकार पता नहीं किसके पास है किसका क्या नाम रखा जाएगा और क्या बताया जाएगा ये अधिकार भी इनके पास नहीं है और लोग इन्हें वंशवादी कहें तो दुःख होता है ! मेरी समझ ये कहती है ये अधिकार जरुर देश से कंट्रोल नहीं होते और ये सिर्फ जो काला धन विदेशों में जमा है सिर्फ उसी की देख रेख के लिए मजबूरी में देश की सत्ता में आते है जिसके लिए कुछ भी करने के लिए तैयार रहते हैं ये जरूर एक राज है जिसको किसी ताकतवर संस्था या देश का समर्थन हासिल है समय इस राज से पर्दा जरुर उठाएगा लेकिन तब तक हमें करना भी क्या ये आपस की बात है अर्थात वंशवादी का आरोप पूर्णतया गलत है बाकी सब सही है !

के द्वारा: dhirchauhan72 dhirchauhan72

यहाँ मैं आपसे थोडा मत भिन्नता युक्त हूँ। पार्टी कोई भी लोकततंत्रिक है या वंशवादी, इसका निर्धारण उसकी कार्य पद्धति से होता है। यहाँ बीजेपी ही एक मात्र लोकतान्त्रिक पार्टी है, क्यूंकी इसी पार्टी में शीर्ष नेतृत्व का चयन कार्यकर्ताओं के अनुरूप होता है। जिसका साफ़ उदहारण है- नरेंद्र मोदी को पी एम् उम्मीदवार बनाना। वर्ना एल के आडवाणी सा वरिष्ठ नेता पी एम् इन वैटिंग था। रही बात नेता पुत्रों की तो- ये तो कैरियर बनानें की बात है, जो चाहे राजनीती को अपना कैरियर बना ले। गड़बड़ तो तब होती जब की राहुल गांधी की तरह पंकज सिंह अपने पापा की सीट से लड़ते, माननीय वसुंधरा राजे अपनी मम्मी, जो अब दुनिया में नहीं रहीं उनकी पिछलग्गू नेता रही होतीं। कोई बी एस पी सुप्रीमो थोड़े ही है बी जे पी में ? बीजेपी में तो नेता होते हैं ना ? एक और बात नेता पुत्रों का राजनीती में आना, इसे हम लोग ही रोक सकते हैं, इस बार चुनाव में गांधी-वंशवाद को धुल चटाकर। शेष फिर kabhee...........

के द्वारा: Pankaj Kumar Mishra Vatsyayan Pankaj Kumar Mishra Vatsyayan

के द्वारा: Ritu Gupta Ritu Gupta

जातिगत आरक्षण को बनाये रखने से पिछड़े अगड़े लड़ते रहेंगे और नेता अपनी राजनीतक रोटी सेंकते रहेंगे देश के नेताओं को किसी आरक्षण से कोई मतलब नहीं कैसे समाज में एकता ना बन जाए यही उपाय करना है जिस दिन अपने देश का समाज उसमें पिछड़े अगड़े दोनों ही हैं यह बात समझ जाए कि आज नेता उनके भले कि बात कह रहें हैं या उनको और पिछड़ा बनाये रखने कि चाल चल रहें हैं उसी दिन से ये बेईमान नेता बेनकाब हो जायेंगे मैं जनार्दन द्विवेदी जी के इस प्रस्ताव का समर्थन करता हूँ कि आरक्षण, आर्थिक आधार पर ही दिया जाना चाहिए अगर वर्त्तमान ब्यवस्था ही लागू रहा तो वह दिन दूर नहीं कि जिनको इस आरक्षण से नुकसान हुवा है वे नक्सलवाद और आतन्कवाद का सहारा ले लेंगे और देश में अशांति फ़ैल सकती है अब पाप का घड़ा भरता जा रहा है. वक्त आ गया है राजनितिक पार्टियां आरक्षण कि वर्त्तमान नीतियों पर पुनर्विचार करें और अपनी वोट बैंक कि राजनीती से इतर देश में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों का भला कैसे होगा इस पर विचार करें आर्कषण जैसे महत्वपूर्ण मसले पर टेलीविजन पर भी चर्चा होनी चाहिए .आपने सही प्रश्न उठाया है मैं आपके विचारों का समर्थन करता हूँ .

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

के द्वारा: शिल्पा भारतीय "अभिव्यक्ति" शिल्पा भारतीय "अभिव्यक्ति"

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: vishalpandit1979 vishalpandit1979

जिस देश की आधी आबादी के पास काम ना हो , निरक्षर हो , कोई भविष्य ना हो , दिशा ना हो , संस्कृति विलुप्त हो चुकी हो , कुपोषित हो उससे क्या उम्मीद रखते हैं ? कौन सा महान काम करने के लायक हैं आजादी के ६५ साल बाद भी भीख से पल रहे लोगों की सोच कुंठित भी होगी कुरूप भी होगी , घृणित भी होगी ! अगर ऐसा ही रहा अगले १० साल में हमारे देश की स्थिति और बदतर होगी ! सभी पुरुषों की मानसिकता पर प्रश्नचिन्ह लगाने की आवश्यकता नहीं है और इतना समझने की जरुरत है इस कुत्सित मानसिकता के पीछे घोर निराशावाद है ! जिसे कुछ नीच लोग जो सत्ता के नशे में चूर हैं देश उनके लिए एक प्राइवेट कंपनी की तरह है जिनका हमारे देश के लोगों से कोई सम्बन्ध नहीं हैं लन्दन से पढ़ाई करते हैं अमेरिका में इलाज कराते हैं स्विट्जरलेंड और पेरिस में घूमने जाते है अपनी पैसा भी वहीं रखते हैं गरीबों को भीख बाँट कर देश को बेचने में लगे रहते हैं ! ये हमारे देश को बदनाम और बर्बाद करने की शाजिश है !

के द्वारा: dhirchauhan72 dhirchauhan72

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

आदरणीया शालिनीजी,बहुत बेहतरीन लेख.आपको बधाई.ये पंक्तियाँ बहुत महत्वपूर्ण और अच्छी लगीं-प्रकृति पुरुष मनु ने अपने शरीर से ही शतरूपा की उत्पत्ति की और उससे विवाह रचाया उद्देश्य था सृष्टि विस्तार किन्तु यह जो समलैंगिक सम्बन्धों के समर्थन का ढोल पीटा जा रहा है इसका उद्देश्य क्या है एक मात्र यही कि जो समलैंगिक है वे शांतिपूर्वक रहे और जो जैसा मन में आयें करते रहें किसी को कोई आपति नहीं होगी किन्तु यह सम्भव नहीं है और वह भी सामान्य जनता के बीचो बीच और इस तरह के समर्थन द्वारा सामान्य जनता को निरपराध होते हुए भी ऐसी दशा भुगतने के लिए तैयार किया जा रहा है जिससे मात्र व्यभिचार ही फैलेगा

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: dhirchauhan72 dhirchauhan72

के द्वारा: चित्रकुमार गुप्ता चित्रकुमार गुप्ता

शलिनी जी !बहुत बधाई !आज आपके इस लेख से मुझे अपने साथ हुयी एक मार्मिक घटना याद आ गई !कुछ वर्ष पहले मुझे आकाश वाणी में एक नारी विमर्श पर इंटर व्यू लेना था ,वहाँ के कार्यक्रम संयोजक बजरंगी जी थेउन्होने जैसे ही लाइव कार्यक्रम शुरू हुआ ,मैंने अपनी दो अन्य महिला साथियों से सवाल शुरू किये!पुरुष द्वारा स्त्री शोषण के प्रश्न पर वे बहुत तेज उखड गए उन्होंने दूर से मुझे सख्ती से समझाने की चेष्टा की ,कि मै केवल यही पूश्न्न पूंछू ,समाज मेयही सन्देश जाये ,की केवल महिला ही महिला की दुश्मन है ,पुरुष ऐसे प्रकरण में कभी जिम्मेदार नहीं होता !मैंने जैसे तैसे इंटर व्यू ख़त्म किया ,और गुस्से में वापस घर आगई !न अपना पैसा लिया न दुबारा ऐसी जगह प्रसारण में भाग लेने गई !बहुत कुछ होता है! पर विरोध भी नहीं होता !!

के द्वारा: ranjanagupta ranjanagupta

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

धीर चौहान जी मैंने नए साल पर प्राण लिया था कि सदा सत्य का साथ दूँगी और वही कर रही हूँ कोंग्रेस ने संविधान की परंपरा को अपनाया है इसमें कोई झूठ नहीं है और राहुल गांधी के अलावा जो अन्य कॉंग्रेसी कह रहे थे वह उनका राहुल गांधी के लिए प्यार व् स्नेह था और आप भाजपा के प्रशंसक है इसलिए उन्हें चमचे कह रहे हैं जबकि आज हर पार्टी वाले दूसरे दल वाले को यही कह रहे रहे हैं इसमें सत्य असत्य का मतलब ही कहाँ रह जाता है और रही कॉंग्रेस को बर्बाद करने की बात तो इसका जवाब राहुल जी ने ही दे दिया है मिट गए इसे बर्बाद करने की सोचने वाले और ख्वाब देखने वाले कॉंग्रेस कल भी थी आज भी है और कल भी रहेगी ज़िंदाबाद

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: Bhagwan Babu Shajar Bhagwan Babu Shajar

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: 1sm1 1sm1

के द्वारा: jlsingh jlsingh

शालिनी जी , देश की इसी परम्परा ने हमारे देश का सत्यानाश किया है ! ............पंडित जवाहर लाल नेहरु की इसी जिद के कारण देश तीन भागों में बंटा , अगर नेहरु प्रधानमंत्री पद की जिद छोड़ देते तो आज देश के तीन हिस्से न होते और चौथे के लिए लड़ाई भी न चल रही होती ...........? १९४७ में कोंग्रेश से प्रधानमंत्री कौन बने इसीलिये कार्यकारिणी की बैठक महात्मा गांधी की अगुआई में हुई कुल १७ सदस्यों की कार्यकारिणी में से १६ ने सरदार पटेल को चुना जिसके बाद नेहरु ने कोंग्रेश तोड़ने की धमकी दे कर अपनी दावेदारी बनाये रखी और महात्मा गांधी ने मजबूर हो कर नेहरु को समर्थन किया और भारत के पहले और अनिर्वाचित जबर्दस्ती प्रधानमंत्री बने जिसके बाद से कोंग्रेश ने तो मानो प्रधानमंत्री पद गांधी या कहो नेहरु खानदान को बेच रखा है , एक कहावत है कि ठग ही ठग से निपट सकता है मेरे आंकलन में बीजेपी का हर नेता प्रधानमंत्री बनाने के लायक है लेकिन कोंग्रेश को हराने में मोदी की सफल हो सकता है और देश को आजाद कराया जा सकता है और जिस तरह कोंग्रेश के हर विरोध के वावजूद गुजरात की हर समस्या को हल करने की क्षमता रखना जो की शिवराज जी और रमन सिंह जी के बस की बात नहीं है एक और जहां शिवराज जी ने अपने प्रयासों से प्रदेश को तो प्रगति तो दी लेकिन घटिया केंद्र सरकार के कारण नॅशनल हाइवे का निर्माण नहीं करा सके ,वहीं रमन सिंह जी इसी कारण नक्सली समस्याओं से अब तक जूझ रहे हैं और अडवाणी जी भी अति सभ्य मानकों के चलते कोंग्रेश को जबाब देने से ज्यादा भैंस के आगे बीन बजाने जैसा ज्यादा लगता है जबकी मोदी की ललकार कोंग्रेश को अंदर तक घायल करती है जो जनता को बहुत रास आ रहा है और आप विश्वाश करिये जनता इस बार कोंग्रेश को वोट नहीं सजा देने के मूड में है आपको भी सोचना चाहिए जनता अगर बाल्मीकि ,अशोक ,अकबर और कोंग्रेश को माफ़ कर सकती है तो मोदी को बिना कसूर सजा नहीं देनी चाहिए और में ये मानता हूँ कोंग्रेश के शासन में इतना बड़ा अपराधी ( आप के अनुसार मोदी ) अब तक शलाखों के पीछे नहीं है तो कोंग्रेश को राजनीति छोड़ देनी चाहिए !

के द्वारा: dhirchauhan72 dhirchauhan72

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi